Title :-Cultural Nationalism in Hindi Literature: Concept and Expression Download Pdf
Author :-Mausami Singh Tiwari
Date of Publication (ONLINE) :-19-03-2026
DOI- 10.71037/Shodhaamrit.v3i1.42
Online Publication Certificate No. :– SMT/3142
cite this article:
Tiwari Mausami Singh, “Cultural Nationalism in Hindi Literature: Concept and Expression“, Published in SHODHAAMRIT(शोधामृत), ISSN-3048-9296(O) & 3049-2890(P), Volume-3 | Issue-1, Jan.-March, 2026, Page No. :-322-331. URL: https://shodhaamrit.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/07/Prashant-kumar-singh-Shodhaamrit-Vol-3Issue-1-Jan.-March-2026-pp-322-331.pdf
Abstract : प्रस्तुत शोध पत्र हिन्दी साहित्य में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की अवधारणा, उसके दार्शनिक अधिष्ठान और ऐतिहासिक विकास का गहन एवं विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। राष्ट्रवाद की पाश्चात्य और भारतीय संकल्पनाओं के मध्य विभेद स्थापित करते हुए, यह शोध पत्र स्पष्ट करता है कि भारत में राष्ट्रवाद मात्र एक भौगोलिक, राजनीतिक या आर्थिक परिघटना नहीं है, अपितु यह एक विशुद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना है, जिसकी जड़ें वेदों, पुराणों और उपनिषदों तक जाती हैं। अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त से लेकर महर्षि अरविन्द, स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक राष्ट्रवाद, तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ तक, भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की वैचारिकी का क्रमिक विवेचन किया गया है। साहित्य के संदर्भ में, यह पत्र सिद्ध, नाथ और भक्तिकाल की समन्वयवादी चेतना से होते हुए आधुनिक काल के नवजागरण तक की यात्रा का सूक्ष्म परीक्षण करता है। भारतेन्दु युग की आर्थिक-सांस्कृतिक प्रतिरोध चेतना, द्विवेदी युग में मैथिलीशरण गुप्त की कृति ‘भारत-भारती’ के माध्यम से अतीत के गौरव गान, तथा छायावाद में जयशंकर प्रसाद (विशेषतः ‘चन्द्रगुप्त’ के गीतों) और सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ (‘राम की शक्तिपूजा’) के युगीन अंतर्द्वंद्व और सांस्कृतिक अस्मिता की खोज का मनोवैज्ञानिक एवं साहित्यिक विश्लेषण इस शोध का मुख्य केंद्र है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा (माखनलाल चतुर्वेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान) और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के माध्यम से सामासिक संस्कृति के विमर्श को भी उद्घाटित किया गया है। अंततः, यह शोध पत्र स्थापित करता है कि हिन्दी साहित्य में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद किसी भी प्रकार की संकीर्णता, आक्रामकता या अलगाववाद से मुक्त होकर मानवतावादी, समन्वयवादी और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के वैश्विक आदर्शों पर आधारित है।
Keywords : सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, नवजागरण, हिन्दी साहित्य, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा, भारत-भारती, राम की शक्तिपूजा, सामासिक संस्कृति, एकात्म मानववाद।
Publication Details:
Journal : SHODHAAMRIT(शोधामृत)
ISSN : 3048-9296 (Online) & 3049-2890 (Print)
Published In : Volume-3 | Issue-1, Jan.-March, 2026
Page Number(s) : 322-331
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://shodhaamrit.gyanvividha.com | ISSN-3048-9296(O) & 3049-2890(P)
Loading Viewer…




Total Users : 4580
Total views : 10323