शोधामृत

Shodhaamrit

कला, मानविकी और सामाजिक विज्ञान की सहकर्मी समीक्षित त्रैमासिक मूल्यांकित शोध पत्रिका

(बहुविषय(कला, मानविकी और सामाजिक विज्ञान), बहुभाषिक(सभी भाषा) और ऑनलाइन & प्रिंट शोध पत्रिका)

Journal DOI : https://www.doi.org/10.71037/Shodhaamrit

Challenges of Rural and Border Policing: A Historical Study of Crime and Public Relations in Bilaspur District (Chhattisgarh) (1956–2000)

Title :-Challenges of Rural and Border Policing: A Historical Study of Crime and Public Relations in Bilaspur District (Chhattisgarh) (1956–2000) Download Pdf
Author :-Khilavan Singh Netam/Dr. Pooja Sharma

Date of Publication (ONLINE) :-12-07-2026
DOI- 10.71037/Shodhaamrit.v3i3.05
Online Publication Certificate No. :– SMT/3305

cite this article:
Netam Khilavan Singh/Sharma Dr. Pooja, “Various Arts Discussed in the Agni Purana : An Analytical Study“, Published in SHODHAAMRIT(शोधामृत), ISSN-3048-9296(O) & 3049-2890(P), Volume-3 | Issue-3, July-Sept., 2026, Page No. :-22-34. URL: https://shodhaamrit.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/07/Khilavan-singh-netam-Dr.-Pooja-Sharma-Shodhaamrit-Vol-3-Issue-2-July-Sept.-2026-pp-22-34.pdf

Abstract : भारत में पुलिस व्यवस्था केवल कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, जनसुरक्षा, अपराध नियंत्रण तथा नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करने का भी प्रमुख माध्यम है। ग्रामीण एवं सीमा क्षेत्रों में पुलिसिंग की प्रकृति शहरी क्षेत्रों से भिन्न होती है क्योंकि वहाँ भौगोलिक दूरी, सीमित संसाधन, सामाजिक विविधता, आर्थिक विषमताएँ तथा प्रशासनिक चुनौतियाँ अधिक होती हैं। छत्तीसगढ़ राज्य का बिलासपुर जिला ऐतिहासिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन के पश्चात मध्य प्रदेश का हिस्सा रहे बिलासपुर जिले में पुलिस प्रशासन ने बदलती सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप अनेक परिवर्तन देखे। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन तक इस क्षेत्र में अपराध की प्रकृति, ग्रामीण पुलिसिंग, जनसंपर्क तथा प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। यह शोध-पत्र वर्ष 1956 से 2000 तक बिलासपुर जिले में ग्रामीण एवं सीमा पुलिसिंग की चुनौतियों का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में अपराध की प्रवृत्तियों, पुलिस-जन संबंधों, संसाधनों की उपलब्धता, प्रशासनिक ढाँचे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया गया है। साथ ही सामुदायिक पुलिसिंग, जनसहभागिता तथा स्थानीय प्रशासन के सहयोग की भूमिका का भी अध्ययन किया गया है। अध्ययन मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिनमें सरकारी प्रतिवेदन, अपराध सांख्यिकी, शोध-पत्र, पुस्तकें तथा ऐतिहासिक दस्तावेज सम्मिलित हैं। निष्कर्षतः अध्ययन यह दर्शाता है कि प्रभावी ग्रामीण पुलिसिंग केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थानीय समुदाय का विश्वास, पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक तथा उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था भी समान रूप से आवश्यक है।

संकेत शब्द : ग्रामीण पुलिसिंग, सीमा पुलिसिंग, बिलासपुर, छत्तीसगढ़, अपराध, जनसंपर्क, सामुदायिक पुलिसिंग, ऐतिहासिक अध्ययन।

Publication Details:
Journal : SHODHAAMRIT(शोधामृत)
ISSN : 3048-9296 (Online) & 3049-2890 (Print)
Published In : Volume-3 | Issue-3, July-Sept., 2026
Page Number(s) : 22-34
Publisher Name :
 Mrs Anubha Chaudhary | https://shodhaamrit.gyanvividha.com | ISSN-3048-9296(O) & 3049-2890(P)

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