Title :-Girmitiya Banam Pravasi Vimarsh: Visthapan, Yatana aur Asmita ka Sahitya Download Pdf
Author :-Blesssanraju, Research Scholar, Department of Hindi, University of Kerala.
Date of Publication (ONLINE) :-15-07-2026
DOI- 10.71037/Shodhaamrit.v3i3.11
Online Publication Certificate No. :– SMT/3311
cite this article:
Netam Khilavan Singh/Sharma Dr. Pooja, “Girmitiya Banam Pravasi Vimarsh: Visthapan, Yatana aur Asmita ka Sahitya“, Published in SHODHAAMRIT(शोधामृत), ISSN-3048-9296(O) & 3049-2890(P), Volume-3 | Issue-3, July-Sept., 2026, Page No. :-68-75. URL: https://shodhaamrit.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/08/Blesssanraju-Shodhaamrit-Vol-3-Issue-2-July-Sept.-2026-pp-68-75.pdf
Abstract : हिंदी साहित्य के समकालीन विमर्शों के अंतर्गत ‘प्रवासी साहित्य’ ने विगत कुछ दशकों में अपनी एक अत्यंत सुदृढ़ और महत्वपूर्ण जगह बना ली है। साहित्य जगत के अधिकांश आलोचकों और शोधकर्ताओं ने अब तक ‘गिरमिटिया साहित्य’ को प्रायः ‘प्रवासी साहित्य’ के एक उप-शाखा या उसी के एक ऐतिहासिक विस्तार के रूप में देखा और विश्लेषित किया है। प्रस्तुत शोध आलेख का मुख्य उद्देश्य वैचारिक और तार्किक धरातल पर यह स्थापित करना है कि हिंदी साहित्य में गिरमिटिया साहित्यिक विमर्श महज प्रवासी साहित्य का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक सर्वथा अलग विधा और स्वतंत्र साहित्यिक धारा है। इस आलेख में प्रवास के स्वरूप, जीवनानुभवों, मातृभूमि से संबंध, भाषाई विकास और साहित्यिक दृष्टि के आधार पर प्रवासी साहित्य और गिरमिटिया साहित्य के बीच के तात्विक अंतरों का गहन विश्लेषण किया गया है। जहाँ आधुनिक प्रवासी साहित्य मुख्यतः स्वैच्छिक प्रवासन, वैश्वीकरण, अवसर, आधुनिक पहचान के संकट और नॉस्टैल्जिया (स्मृति) पर केंद्रित है, वहीं गिरमिटिया साहित्य उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के अनिवार्य एवं बंधुआ प्रवासन, अमानवीय औपनिवेशिक शोषण, सांस्कृतिक अस्तित्व की लड़ाई और प्रतिरोध का साहित्य है। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में विकसित इस साहित्य की भाषा (जैसे सरनामी हिंदी, फिजी बात) और संवेदना का विशिष्ट स्वरूप इसे एक अलग विमर्श के रूप में मान्यता दिए जाने की आवश्यकता को अकाट्य रूप से रेखांकित करता है।
Keywords : गिरमिटिया विमर्श, प्रवासी साहित्य, अस्मिता का संघर्ष, औपनिवेशिक प्रतिरोध, सरनामी हिंदी, सांस्कृतिक विस्थापन, बंधुआ प्रवासन।
Publication Details:
Journal : SHODHAAMRIT(शोधामृत)
ISSN : 3048-9296 (Online) & 3049-2890 (Print)
Published In : Volume-3 | Issue-3, July-Sept., 2026
Page Number(s) : 68-75
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://shodhaamrit.gyanvividha.com | ISSN-3048-9296(O) & 3049-2890(P)
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